सोनभद्र। प्राकृतिक सुंदरता और खनिज संपदा के लिए पहचाने जाने वाला सोनभद्र आज सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है। जिले के कई मार्गों पर जगह-जगह खराब सड़कें, खतरनाक मोड़, गड्ढे, धूल और भारी वाहनों की आवाजाही लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।
हालात ऐसे हैं कि सड़क पर निकलने वाला व्यक्ति यह नहीं जानता कि अगले मोड़ पर उसके सामने क्या खतरा खड़ा है। कब कोई वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाए, कब किसी परिवार का सदस्य हादसे का शिकार हो जाए—इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन हादसों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
क्या जिम्मेदारी उन अधिकारियों की नहीं है, जिनके पास सड़क व्यवस्था, यातायात नियंत्रण और सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है? क्या जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों को जनता की परेशानियों और लगातार सामने आ रही दुर्घटनाओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं देना चाहिए?
सोनभद्र में बढ़ता धूल और प्रदूषण भी चिंता का विषय है। भारी वाहनों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में सड़क की स्थिति और धूल से आम लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है।
जनता का सवाल सीधा है—जब सड़क पर खतरे दिखाई दे रहे हैं, तो जिम्मेदार विभाग कार्रवाई का इंतजार क्यों कर रहे हैं?
सड़क केवल आने-जाने का रास्ता नहीं है। यह लोगों की जिंदगी से जुड़ी व्यवस्था है। एक छोटी सी लापरवाही किसी परिवार की खुशियां छीन सकती है।
जरूरत है कि प्रशासन जिले के संवेदनशील मार्गों और दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान करे, खतरनाक मोड़ों पर आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था लगाए, खराब सड़कों की मरम्मत कराए, धूल और प्रदूषण पर नियंत्रण करे तथा यातायात नियमों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करे।
सोनभद्र की जनता विकास चाहती है, लेकिन ऐसा विकास नहीं जिसमें सड़क पर निकलना ही जोखिम बन जाए।
अब सवाल जनता पूछ रही है—
“हादसा होने के बाद कार्रवाई होगी या हादसे रोकने के लिए पहले से व्यवस्था की जाएगी?”
सोनभद्र की सड़कें बनीं सवाल: आखिर हादसों की जिम्मेदारी किसकी?
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