सोनभद्र, जो अपनी प्राकृतिक संपदा और खनिज भंडारों के लिए जाना जाता है, आज विकास के मामले में उपेक्षा का शिकार है। इसका जीता-जागता उदाहरण यहाँ की खस्ताहाल सड़कें हैं, जो न सिर्फ यात्रा को मुश्किल बनाती हैं बल्कि हर पल किसी बड़े हादसे को भी न्योता देती हैं।
वीडियो में दिखाए गए गहरे गड्ढे और उनके किनारे संतुलन बनाते भारी वाहन यह चीख-चीखकर कह रहे हैं कि लोगों की जान को किस तरह खतरे में डाला जा रहा है। क्या वाकई सोनभद्र के निवासियों को उनका हक़ नहीं मिलना चाहिए? क्या टैक्स देने के बावजूद उन्हें इस तरह के जानलेवा रास्तों पर चलने के लिए मजबूर करना सही है? इस बारे में आपकी क्या राय है?
सोनभद्र के साथ सौतेला व्यवहार
जब सरकार 18% जीएसटी काट रही है तो व्यवस्था सन 1947 का क्यों दे रही है?
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